A story I want to share

I just tell you a story which I read somewhere and forget the author name

A guy sitting in a bar, broken and disheartned with A lottery chart in his hand. 

All of a sudden a shabby, beggar looking guy appears in front of him and said just one peg I will help you to solve this lottery puzzle. He agreed.

After consuming that he gave one piece of paper and said I have mentioned the numbers in it you have to play accordingly and put money as  mentioned in the chart and when you are plus stop playing. Come next day to play again like on and on. And that beggar left the place.

After one year the same man who is now a millionaire sitting on the same table appears to be much disturbed than earlier. The beggar came again and said the money you want you have If am not wrong. Now that rich guy thanks very much for that chart you have given me. Money is no problem for me. But I was so involved in this gambling that my married life is in problem. I love my wife and I can’t live without her. She filed a divorce . And going to marry with one of my friend.

Beggar said just one bottle of scotch I will solve your this problem also.

He said OK

Beggar put that bottle in his bag and said “Give that gambling chart to your friend”

 एक दूध का दांत टुटा है अभी, अभी तो बत्तिसियों बहारों में खिलना है तुझे।

           EGO 

ये भी होना था कि एक हादसे ने बचा लिया मुझको,
सिर्फ एक गुनाह कम था पूरी सज़ा के लिए।

डाल सा झुका, तोड़कर जूड़े में सजाया उसने,
उसी ने बचाया निकला था जिसके कत्ल के लिए।

उस Punch line की खातिर कहानी अधर में है, उसके अधरों का एक सच अधर* में लटका रह गया।

सुबह जिमखाने में शाम शराब खाने में,
कितना मज़ा है बचपने से हार  जाने में।

इसे ही लड़खड़ाना कहते हैं शायद जब 
शाम एक कदम रखता हूं घर की तरफ दूसरा चलता है   शराब खाने में ।

इश्क़ की हर गली का यूँ तो पता है मुझे,
तेरी गली के सौ चक्कर और एक दीदार मज़ा आ गया वसूल पाने में।

मेरी आँख पर पट्टी बांधकर वो तो छूता है छिप जाता है
और हम खाली हाथ रह गये तेरी इस आँख-मिचौली में।

इस नींद को पुरानी आदत जो है तेरे दीदार की ,
आजकल देर हो जाती है उसे ज़हन से आँख तक आने में।

पीठ पर वो एहसास बाकी है, तेरी जीत और मेरी जान में जान आने  का,
वो तेरे हाथों से जानबूझ कर पीठ पर ‘धप्पा’खाने में।

*अधर Means lips and or in the middle

On Father’s Day

 to myself

And remembering the Father’s Day

कभी खुद से बात की है, 

कर ना ज़रा?

आईने को मौका दे,

उसे बोलने दे न ज़रा?

पिता के सामने हम बोलते क्यों न थे,

समझने दे न ज़रा।

समय बदला है जगह भी बदली है,

तंग कपड़े पहनने का फैशन है,

शरीर को

adjust करने दे न ज़रा।
सर ढक कर चल

नूर का आदर कर,

हिदायत को बन्दिश न समझ।

लाठी न पकड़

कार से मैं बेकार हो जाऊंगा

मुझे पैदल चलने दे न ज़रा।
कभी खुद से बात की है……..
कभी खुद से बात की है……..

ये घड़ी मेरे पीछे चल रही है

दिवार पर है

अब लग रहा है मेरे पीछे पड़ी है।

अपनी खिड़की से नीचे

अपने मजनूं को

जैसे लैला देख रही है।

तू भी ऊपर देख न ज़रा

क्या कयामत लग रही है।
कभी खुद से बातकर

आज रूह को बोलने दे ज़रा……..

मैं अधूरा हूं, अभी मुझमे गुंजाइशे बहुत हैं,                                          जब ‘मैं’ गुज़र गयी तो समझ लेना पूरा हो गया।

पतझड़ का पता भी वही है
बसन्त का पता भी वही है।
इस शजर ने जो झेली है आँधियाँ
तुझे इन हवाओं का पता नहीं है।

चाँद सूरज अपने खेमें में रह रहे हैं,
जब एक चमकता है तो दूसरा रौशन नहीं है।

किसी के जाने से हलचल सी पैठ गयी है,
सीने को चीरती तरंगे है पत्थर का पता नहीं है।

पिंजरे ने कहा तू मेरा जुर्म साबित न कर पाएगा ए परिन्दे,

ये तेरी सज़ा का सबब है, तेरा घर नहीं है।

मौसम का एक मिज़ाज़ होता है समझ लो तुम भी,                       ऋतु के तरह बदलते तो कहते मौसम अच्छा था.

बिजली नहीं देखती ये मकाँ किसका था,
हम बहस न करते तो अच्छा था।

गुस्से में सारे बाल और उलझा लिए तुमने,
उस वक़्त गर मैं कंघी न देता तो अच्छा था ।

ज़माने को हराकर मैने पाया था तुम्हें,
ज़िद कब छोड़नी है समझ लेते तो अच्छा था।

मौसम भी अपने हिसाब से पत्ते चलता है,
पतझड़ में बाजी पत्ते डाल-२ के हारे जाएं तो अच्छा था।

मौसम का अपना मिज़ाज़ होता है समझ लो तुम भी,
ऋतु के तरह गर बदलते तो कहते मौसम अच्छा था.

Black is that deep dark status from where you can easily achieve the state of ‘Enlightenment’.

मैं ऐसा क्यूं हूँ, मूझे ऐसा ही रहने दे,

कोई ज़रुरत है जो मेरे इन्तज़ार में है।

मुझे बहने दे ये मेरी फितरत है,

कोई समुन्दर है जो मेरे अथाह इन्तज़ार में है।