Don’t play with fire : Happiness like crackers​

जहां से रौशनी आ रही

वहां से मत आना,

अंधेरा जल रहा है

संभल कर,  आ  ना।
मुझ से जुड़ें

मेरी आग से न जुड़ने लगे।

आग लपेट लेगी,

सँस्कार देता हूं, दाह*  ना।
Dah* This word is used for when you are in a state of annoyance, or something happens that wasn’t intended.

Russians used differently

दो महाकाव्यः सम्पूर्ण सँसार

आज का विचारः

ये धर्म निरपेक्ष देश है, 
यहां एक की नहीं, 
सही की चलेगी।
चश्मा चढ़ा रंग का नहीं,
तेरी नज़र कुछ कमज़ोर है।

भक्ति तो अन्धे की भली,
अब तैयार है तू तर्क भी कर ले,
गाय पर अब कृष्ण ही सवार है
तर्क पर याद रख 
महाभारत एक आभार है।

हमने नैपोलियन* भी पढ़ा है
जिसने नुक्सान का जायज़ा लिया।
फिर एक सम्राट अशोक हुआ,
जीतकर भी हार गया।

धर्म की अधर्म पर जीत होगी,
ये धर्म जानता है,
ये महाभारत सनातन है,
धर्म युद्ध है उसमें भी
गीता एक ही सार है।

*  नैपोलियन चाहता तो युद्ध जीत सकता था। पर वो जानता था कि युद्ध जीतने के बाद वो अपने दस बारह साथियो के साथ लाशों के ढेर पर खड़ा होगा। नेपोलियन खुद हारकर मानवता को जिता गया। जो अशोक दि ग्रेट न समझ सका।

नोटः हिन्दू मान्यता के अनुसार महाभारत पढ़ाया सबको जाता है पर घर पर रामायण रखी जाती है पूजी जाती है। घर में महाभारत रक्खना वर्जित है।

आफताब कभी परछांई महसूस नहीं करता,                                          चांद समेटता है और चांदनी बिखेर देता है।

या तो छाता होता, पर पर्दा न होता,

और हमको मंज़ूर नहीं था दीवार होना।

परछाई में हाशिए के भीतर एक अन्धेरा रहता है,

वो हमीं हैं जो चाहते हैं छांव से ठंडक होना।

Moksha-patamu               The ancient name of saanp-sidhi

सांप-सीढ़ी 

(खेल ही खेल में ज़िन्दगी सांप-सीढ़ी  हो गयी,
दिवार पर टंगी तस्वीर पर जरा धूल क्या जमी,
बच्चों ने तस्वीर ही हटा दी गन्दगी दूर हो गयी।)

वो सड़क सीधी है, पर रास्ता टेढ़ा है 
और ये रास्ता सीधा है पर सड़क टेढ़ी है.

फिर बीच में ये मनगढ़ंत पगडंडियां प्यार की आड़ी तिरछी 
काट ले तो सांप, चढ़ा दे तो सीढ़ी है.

भक्ति मेरी बुआ लगती है, यही खाला जी का घर है क्या,
खुदा तो खीर है, मुझे मीर ने बताया ये खीर टेढ़ी है .

जो जीतता है वो अपने रंग में रंगना चाहता है। लोकतन्त्र में हारने वाला अपना रंग छोड़ता नही है विलय के बाद भी बरकरार रहता है।

केसरी पहनना साम्प्रदायिक होना नही है.
चश्मा अगर राजनीती का  हो तो उसके हर रंग से नेता को समस्या  है. जबकि ये दीगर है कि सफेद कुरता पायजामा पहने कोई निकले तो नेता शब्द व्यंग बनकर ही मुख से निकलता है।

एक बार एक नेता ने छतरियां खरीदी बाँटने के लिए.मल्टी कलर की छतरी थी. उसमे सब रंग थे.
नीला काला भूरा  पीला. केसरी और हरा भी. पहली ही बरसात में छतरी चूने लगी. चलो होता है . कपडा है फट गया होगा दरअसल उनमे छेद हो गए. यहां तक तो ठीक था. और coincidence ये था की सभी छतरियों में जो छेद हुए वो केसरी रंग को छोड़ कर बाकि की सभी रंग की टल्लियों (कपड़े के patches) में से रिसाव था।
EVM machine की तरह की छतरी में गड़बड़ी होने की शंका की तरह इसको भी राजनैतिक पार्टीयां अमली जामा पहनाने से नहीं चूकी।

संसद में प्रश्न उठ गया कि केवल केसरी रंग की टल्ली patch ही बेहतर क़्वालिटी की क्यों लगी उसमे छेद क्यों नही हुआ. ये पार्टी साम्प्रदायिक है. दूसरे रंग को नीचा दिखाना चाहती है.
सुना है एक FIR इन्द्र देव के खिलाफ भी हुई है झुमरी तलैया से.
अब ये खोज जा रहा है की इन्द्र देव किसके कार्यकाल में ये धरती छोड़कर भागे.