शराब छोड़कर भांग पीने लगा है वो, उसके रंग में रंगने की ये एक कुव्यवस्था है।

बेखुदी में खुदा आसानी से मिलता है,
आजकल बाखुदाई में ढकोसला बहुत है।

बेखुदी-बेसुध
बाखुदा-ईश्वर भक्त

तुम चाहो तो तराश कर जगा सकते हो मुझमें,
हो सकता है मुझमें तुम्हें वो बेखुदा मिले।

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Life is fair……..enough

व्यंजनो की सीढ़ी में
कुछ देर सुट्टे में
सिगरेट लगाऊं या बीड़ी।
धूम्रपान निषेध के बोर्ड के पीछे
कुछ खुद की अवेहलना में
शरारत है ज़िन्दगी।

फीका-नमकीन,
खट्टा-मीठा,
और
सच और झूठ।
कब किस तरह प्रयोग करना है,
यही है ज़िन्दगी ।।।

Searching window Actually: Not on Google

खिड़की कई बार खुली, जिस दिन हम न गुज़रे उसकी गली से,
ये उनके लिए है जो कहते हैं कि वो हमपर झांकता तक नहीं.

वो ये कहता तो रहता है कि हमें जानता तक नहीं,

हम ये जानते हैं वो मसखरा भी है तुम्हें पता तक नहीं।

This is not moon. My exhaust fan is missing from the wall

तू झोली बड़ी ले आया है
पर तेरा किरदार बड़ा नहीं है।

तेरी ख्वाहिश तो ठीक है
पर उसका भी जहाँ मुकम्मल नहीं है ।

ये इल्ज़ाम उछाला है देखें किसके सर हो,
काले चोर पर है जिसका अता पता नहीं है।

कश्मीर: स्वर्ग पाने में समस्या तो है, वहां बच्चा तक जिहाद समझता तो है।

कश्मीर का मौसम बहुत ठंण्डा है, मिजाज़ गरम है,

तासीर की पूछिए तो जैसे गोली की आवाज़ नरम है।

मेरे मकान की दो छतें हैं।

एक छत पत पर छीचड़े डालता हूं चील कौओं का पेट भरता हूं,
दूसरी छत पर दाना डालता हूं, कबूतरों चिड़ियों को पालता हूं।

जिस दिन मेरी आमद नहीं होती मैं कबूतरों चिड़ियों के साथ भूखा रह जाता हूं।
इन चील कौओं को कोई फर्क नहीं पड़ता, मै मन मसोस लेता हूं क्योंकि उसी दिन कुछ कबूतर चिड़ियों को जब मैं गिनती में कम पाता हूं।

कल कोई कश्मीर के दो जख्मी कबूतर छोड़ गया है घर पर,
एक चिड़िया मुफ्त में उड़़कर चली आई है देखता हूं उसे भी बचा पाता हूं।

Genius in vain………………… Like vegetables बुर्का, पालिथीन बैग और कठपुतलियाँ

हमको आवाज़ उठानी चाहिए,

मुझे सब्जी बुर्के में चाहिए।।

कठपुतली उजाले में, दर्शक सब अन्धेरे में,

हमारी भी डोर उस ऊपर वाले के हाथ होनी चाहिए।

“हमें नूमाइश के तौर नहीं चाहिए,

बस ठानिए हमें पोलिथिन बैग नहीं चाहिए।