यूं तो बरसात में कई बार मिले वो, पर वो इन्द्रधनुष वाली अभी बरसात नहीं हुई।

वो जब आसान हुआ तो और दुश्वार हो गया,
अब मुश्किल को मुश्किल मेरी सादगी पर है।

इन्द्रधनुष ने सब रंग दे दिए बारिश में घोलकर
बचपना एक-२ रंग अलग चाहता है अपनी ज़िद पर है।

कश्मीर का मौसम बहुत ठंण्डा है, मिजाज़ गरम है।तासीर की पूछिए तो गोली की आवाज़ से सही मर्ज़ का पता चलता है।

मेरे मकान की दो छते हैं।

एक छत पत पर छीचड़े डालता हूं चील कौओं का पेट भरता हूं,
दूसरी छत पर दाना डालता हूं, कबूतरों चिड़ियों को पालता हूं।

जिस दिन मेरी आमद नहीं होती मैं कबूतरों चिड़ियों के साथ भूखा रह जाता हूं।
इन चील कौओं को कोई फर्क नहीं पड़ता, मै मन मसोस लेता हूं  उस दिन जब कुछ कबूतर चिड़ियों को गिनती में कम पाता हूं।

कल कोई कश्मीर के दो जख्मी कबूतर छोड़ गया है घर पर,
एक चिड़िया मुफ्त में उड़़कर चली आई है देखता हूं  उसे बचा भी पाता हूं।

फोटोग्राफर बहूत अच्छा हूं, जिसकी भी तस्वीर खींचता हूं उसमेंं जान फूंक देता हूं।

मरते वक्त अपनी सेल्फी ज़रूर लेना चाहूंगा,
और फिर इजाज़त भी लूंगा एक पल की 
कि बेदम दिखता कैसा हूं।

मुझमें शफा है लोग कहतें हैं 
कि  फोटोग्राफर बहूत अच्छा हूं।
जिसकी भी तस्वीर खींचता हूं
उसमे म़े जान फूंक देता हूं।

जोन से वक्त पर दस्तक दोगे
उसी बेला सा निकलूंगा।
बस खाब हूं ब्लैक एण्ड व्हाइट में,
रंगीन का सच्च दिखा देता हूं।

बहुत शौक है खुद को सही देखने का,
तेरे खरीदे हुए सारे
पहले आईने तोड़ देता ह़ूं।

पला हुआ तोता है
राम-२ अल्लाह-२ बोले है
पिंजरे को तोड़
वोह खुद उड़ जाएगा
तू फितरती है
सहज बनाना नहीं है होना होता है
ये बता देता हूं।

टूटकर नींद आ गई है, कितने आराम से सोया हुआ है, ये जो जागा हुआ है ज़िन्दगी की गोली खाया हुआ है।

पत्ता टूटा हुआ है 

लेकिन सहेज कर रक्खा हुआ है,

कोई सलीके से कह सकता है 

कि ज़िन्दगी से कटा हुआ है।

मत पूछ मुझसे मेरे खुलुस का सिला,लोग बर्दाश्त कर रहे हैं मुझे अजीब जानकर।

मत पूछ मुझसे मेरे खुलुस* का सिला,

लोग बर्दाश्त कर रहे हैं मुझे अजीब जानकर।

मैं भी उसी को चाहता हूं, जिसे तू चाहता है,

नेमत है मुझे काफिर करार दिया नाम जानकर।

*खुलूस-निर्मलता