कबीर  कबीर है।                              कसम से कड़वी खीर है।।

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मैं बोला उसे बैठे बिठाए
अभी ज़िन्दगी पड़ी है कुछ वक्त ही काटा जाए।

अब जाके बुढ़ापे में वो जो खुलके मिला हमसे  
हम सोचते रहते हैं कि इसे ऐसे न तो कैसे काता जाए।

ये वक्त भी सुनते थे कम्बख्त बड़ी सख्त जाँ है,
अब वो भी दुविधा में है इस भीष्मपितामह से कैसे निबटा जाए।


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Shades of grey                         देख लूं करके गुनाह जी भर के, आँख भर के अभी देखे हीं कहां हैं।

मैं बुरा हूं एक दो बुराई तूने गिनाई भी,

तूने अभी ग्रे के शेडस् देखे ही कहाँ है।

 देख लूं करके गुनाह जी भर के, आँख भर के अभी देखे हीं कहां हैं।


Life.   Ok 

Life OK.   Later on……

लाइफ ..ok …   लेटर ऑन
बुला ले उसे  वो वैसी कभी दोबारा नहीं मिलती     

प्यार की एक परिभाषा बस इतनी सी है
एक को दूसरे की आदत में ढलना और डालनी होती है ।

फिर एक समय आता है जब सिर्फ छू कर छेड़ना
और देखना उस शरारत की सांसे चल रही होती हैं।

सुबह चाय पर, वो “सुबह” कभी सुस्ता भी लेती है उठती ही नहीं,
पर चाय तो आदत है वो समय पर ज़रूर मिलती है ।
कई बार तो ज़िन्दगी सांस लेना भूल जाती है
वो “इन-हेलर” की तरह उठती है सिरहाने बैठ जाती है। 


एक कली सर उठाए गुलदस्ते में, जैसे भर लाया हो चूज़े जालीदार बस्ते में।

मैंने उन फूलों को जब भी सोचा,
बहुवचन में सोचा’  (कुंवर नारायण)

एक कली तव्वजोह चाहती थी
तूने उस बारे में सोचा।

उसने गर्दन उठा दिखाया 
उकसाया एक आमंत्रण
कभी उस के बारे में सोचा ।


कील दिवार पर मैं नहीं गाड़ता, कहीं उसने तुम्हारी तस्वीर मांग ली और खुदा ने सुन ली।

क्या मुझे ये देखकर खुश होना चाहिए कि तुम्हारी तस्वीर तुमसे अच्छी है?


तुम्हे मुबारक गर तुम्हारी तस्वीर तुमसे अच्छी है,
मेरा ज़हूर* अभी मेरी छवि को संवारने में लगा है।

*वह शक्ति या तत्व जिसके योग से वस्तुओं आदि का रूप आँख को दिखाई देता है/जैसे लालिमा/तेज

ज़मानत का सौन्दर्य जैसे मेक-अप किट से deadly combination निकाल कर दुनिया को लुभा गया।

From movie : Collateral Beauty

Must watch that movie

कुछ लाइने हैं अभी अधूरी हैं क्या कहने हैं,
Destiny और life अलग समय की बहने हैंः

उसे दर्द शराब सा लगने लगा है
लोग समझे वो अजीब सा नशा करने लगा है।

मौत खूबसूरत और ज़िन्दगी क्रूर लगने लगी है,
विकल्प इतने रख दिए कि इख्तियार* भटकने लगा है।
*प्रभुत्व/वश

ज़मानत का सौन्दर्य यही है कि आप को लगता है वो 

आपको सुरक्षित करता है।

कश्मीर से राब्ता: एक गज़ल किताब की।                                        एक गल्ती किसी से हुई बेहिसाब की।

               कश्मीर से राब्ता*
मेरी गज़ल में काफिया रदीफ हो गया रदीफ़ काफिया हो गया         बम के एक धमाके से उस मेरा मतला मकता हो गया।


(*काफिया बदलता है रदीफ नहीं बदलता। मतला मकता- का मतलब क्रमशः उदय और अस्त है।यानी गज़ल के पहले शेर को मतला और आखिरी शेर को मकता कहते हैं।काफिया बदलता है रदीफ कभी नहीं बदलता।

 राब्ता*बातचीत/संपर्क)वगैरा-२


“पकाना, जलाना, भूनना इस आग के तरीके देखो,        

लीपना लिपाना लिप्त होना कभी माथे पर भस्म लगाकर देखो।”
आज मन हुआ कश्मीर पर कुछ लिखा जाए तो सबसे पहले जो शेर मुझे याद आता है
“Gar firdaus bar-rue zamin ast, hami asto, haminasto, hamin ast.” “If there is a heaven on earth, it’s here, it’s here, it’s here.” Mughal Emperor Jehangir said it all when he visited Kashmir in the 17th century.


दूसरा लियाकत जाफरी जी का शेर हैः
“दर्द  ने  मीर  तकी  मीर  बना  रखा  है                                  मुझ  को  इस  इश्क़  ने  कश्मीर  बना  रखा है”


कभी-२ आपको कोई एक शब्द, एक लाईन या  शेर आपके कानों में पड़ता है तो वो एक बीज (सीड) के रूप में काम करता है। उस बीज से बाग़बानी करने का दिल करता है और प्रेरणा देता है कि इस बीज को अंकुरित किया जाए। तो इन पंक्तियों को पढ़कर जो बीज शब्द उभरा वो कश्मीर है कितना ठण्डा कितना प्रज्वलित और कितनी आग।
वो जो सिल्ली-२ आती है हवा तैनू कोई रौंदा होवेगा.
नेचर है ठण्डे इलाकों में जो चीज़े पैदा होती हैं उसकी तासीर गर्म होती है।

मेरे सारे दर्द का हिसाब, बर्फ की सील्ली पर जमा रखा है,
तोड़ने को कोमल हाथों में ये किसने पत्थर पकड़ा रक्खा है।


ये किसने मेरा ख्याल बदलने की कौशिश की है,
ये मेरे आराम में किस चराग ने खलल डाल रक्खा है।
किस्मत के तवे पर कुछ सिकने सा लगा था,
गम की भांप को किसने चिमटे से दबा रक्खा है।
फूला न समाता था गमों में गुबार मेरा,
इस तन्दूर (अखनूर)ने मेरे गमों का फुल्का बना रक्खा है।
वो शिकन उसके माथे पर पहले तो न आती थी,
किसी रुह को पैराहन की सिलवटों नें परेशाँ रक्खा है
ख्वाबों की हदें जो कभी फूलों में तैरा करती थी,
पत्थर से शिकारों को एक ‘डल’ सा अटूट स्मारक बना क्खा है।
जन्नत का रास्ता खुदा ने, जिन्दा की पहुँच से बाहर बना रक्खा है,
इस बात को समझाने की खातिर भारत में एक कश्मीर बना रक्खा है ।
वो कितनी बार मरता है मरने के बाद फिर मरता है,
ये आशिक का कलेजा है, जम्मू से कश्मीर तक मज़ाक बना रक्खा है।


*काफिया बदलता है रदीफ़ कभी नहीं बदलता है,
हमने गज़ल बदल दी है, कश्मीर कहां बदलता है।


एक शरारत को उसने मुद्दा बनाया,
हमने फेंके हुए पत्थरों से फिरसे खुदा बनाया.
जिस्म लहू-लुहान हुआ कश्मीर सा,
*सलीब पर जन्नत की हक़ीक़त थी उससे खाब बनाया.
* The meaning of salib is To Identify Errors not cross

मैने एक गज़ल पढ़ी काफिया बदला उस्ताद रदीफ मिलाने लगे,

एक शराबी से ये क्या तुमने उम्मीद-ए-कदमताल लगा रखा है।