ग़ालिब पर एक तप्सरा : मेरी नज़र में

mirzaghalib

गालिब के जैसी तो नहीं, पर हॉ गुलाबी सी,
हम भी मुंह में जुबॉ रखते हैं,
कोई बतलाए या हम बतलाएं क्या।

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आज का बचपन

किसी शायर ने कहा है मुझे नाम याद नही कि “मैने बच्चों को बातों मे लगा रखा है
काश इतने में गली से गुजर जाए खिलौनेवाला”

मुझे ये उम्मीद  नही  थी  के ये सच  भी  समय  के साथ फीका पड जाएगा।

अब उस बच्चे ने खिलौनो की जिद छोड दी है क्योकि उस खिलौने वाले की  पोटली  मे जितने  भी खिलौने हें वो उस बच्चे के पास हैं। वो जो खिलौने उसकी पोटली मे है पुराने हो चुके थे, इधर कुछ सपने संजो रखें हैं जो बैटरी से चलते है।

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फूल के मुरझाने का सबब..

फूल के मुरझाने का सबब समझ आया 
एक उम्र गुज़र जाने के बाद,
उसने मुझे पहचाना 
मेरे चहरे की झुर्रियां पढ़ने के बाद ।

ज्यादातर पछताए बहुत
दिवाने को पत्थर मारने के बाद,
कुछ के  हाथों  खुदा लग  गया
पत्थर तलाशने के बाद।

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