ये गाडी उसी के सहारे़…

सुख-दुख सदियों से शामिल हैं
किसी गहरी साजिश में,
रहते हैं एक ही छत के नीचे
दुश्मनो की तरह।

सुख-दुख के बीच (-) हायफ़न सा फंसा आदमी
सुरागों की कडी हाथ मे लिए
सदा यही सोचता है जैसे –
चलती बैलगाडी के नीचे,
जलती लालटैन के साथ
चलता हुआ  “पालतु कुत्ता”
सोचता है कि  –
ये गाडी उसी के सहारे चल रही है।

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