Happy New Year friend’s

            नए साल पर….
ये साल तो लौट कर न आएगा,
पर मै तुम्हे तुम्हारी सारी तारीखें लौटा रहा हूं।
इस उम्मीद के साथ कि
स्वर्णिम अक्षरो़ मे,
तराश कर रात-दिन
तुम तरक्की के नए आयाम छूओ
इस कामिल(दक्ष) कामना को लिए
नव-वर्ष मंगलमय हो
तुम्हारे लिए मै दुआ कर रहा हूं।

  

Advertisements

दिया है न दर्द, पर जला करे कोई..

दिया है न दर्द, पर जला करे कोई,
प्यासा दूर तलक समुन्द्र मे रहा करे कोई।
अहसास जानते है हकीकत की परतें,
और सपने साकार करा करे कोई।

Continue reading

तेरि मा. कि.धर इंटॉलरैन्स

         तेरी मा कि……….इंटॉलरेंस
एक आदमी  जिसका नाम समीर खॉन था, की अपने बॉस श्री दामो धर साहेब से बनती नही थी पता नही  क्यों ? उनकी वेव लेंथ में पोसिटिव कुछ भी नही था। दफ्तर में, यहॉ तक की घर मे भी जिक्र होता तो आलोचना ही होती थी।
अब दोनो में कौन ठीक है कौन गल्त इसमें विजडम ‘विवेक’ भी कन्फ्यूज्ड है। क्योकि जितने  भी ‘सो काल्ड इंटेल्लैक्चूअल’ थे, एकता के नाम  पर तो भीड़ की तरह इकट्ठे हो जाते थे और धर्म के नाम पर बंट जाते थे, प्रसाद की तरह कभी नही मिले। वो शायद उस दिन एकमत हुए थेें जब घर  मे आग पूरी तरह भडकी थी तो सभी एक ही दरवाजे से ज़रूर
बाहर निकले थे। वरना सभी की मंजिलों के रास्ते अलग अलग थे पर  फैक्टरी  एक ही  थी।
मैं यहॉ ये बता दूं यह दफ्तर जिसकी मै बात कर रहा हूं यह अगरबत्ती बनाने वाली एक फैक्टरी का दफ्तर है। और अपने प्रोडक्ट अगरबत्ती के हर पैकट के साथ एक ‘माचिस’
मुफ्त देती है। और माचिस की डब्बी का ब्रैडं
डेमोक्रेसी के नाम से बिकता है। और अगरबत्ती का नाम है “मै हूं ना”। जब तक अगरबत्ती अपना अहम नही जलाएगी तब तक खुशबू नही देगी। हर धर्म स्थान पर सुलगती है नही सही  शब्द – महकती हैै और खुश्बू बिखेरती है।

एक दिन पार्टी में दफ्तर के सभी लोग जमा थे।
चाय पानी ड्रिंक्स इत्यादी सभी था। ठहाके गूंज रहे थे।  ये समीर खॉन चुपके से उठे और अपने बॉस मि. धर  साहेब के कान मे हल्के से फुसफसाये ” तेरि मा कि.धर………..इंटॉलरेंस ” और अलग जाकर खडे हो गये। चुपचाप । फिर क्या था बॉस तो बॉस थे जो गालियॉ देना शुरू किये, मामला रोके नही रूक रहा था। सबकी नजर मे समीर खॉन साइलेंट मोड़ पर थे और हैं । और बास सबकी नज़रों में  इंटॉलरैटं। जाहिर है गाज बॉस पर गिरेगी। क्याेकि दफ्तर मे अगर चूहा भी मरेगा तो जवाबदेही बॉस की होगी। कर्मचारी की तो नही होगी। देश मे भी यही हो रहा हैै।
अच्छा अब इसे कोई धर्म का रंग न दे इस मामले में समीर खान  बहुत दिमाग रखता है। अब ये बॉस क्योकि दूसरे धर्म का है तो अभी कुछ दिन पहले अपने एक दूसरे साहब  जो  उनके अपने  के हैं जिनका नाम फारूख खॉ हैं, उनसे समीर की कुछ अनबन हुइ तो समीर खॉन ने अपने कुत्ते का नाम फारूख रख लिया। लोकतन्त्र है एसा कर सकते हैं।और लोकतन्त्र है दूसरा अन्यथा भी ले सकता है। किन्ही शब्दों में इसे
आजादी  का दुर्पुयोग  भी  कहते हैं।
परन्तू इस दफा किरदार सीन से बाहर हो गया।
अगरबत्ती सुलगी नहीं जल गई। अब जल गई तो खुशबू भी नही रही। डब्बी में जितनी  भी

Continue reading

 तेरी मा कि……….इंटॉलरेंस 

एक आदमी  जिसका नाम समीर खॉन था, की अपने बॉस श्री दामो धर साहेब से बनती नही थी पता नही  क्यों ? उनकी वेव लेंथ में पोसिटिव कुछ भी नही था। दफ्तर में, यहॉ तक की घर मे भी जिक्र होता तो आलोचना ही होती थी।
Continue reading