तेरी मा कि……….इंटॉलरेंस 

एक आदमी  जिसका नाम समीर खॉन था, की अपने बॉस श्री दामो धर साहेब से बनती नही थी पता नही  क्यों ? उनकी वेव लेंथ में पोसिटिव कुछ भी नही था। दफ्तर में, यहॉ तक की घर मे भी जिक्र होता तो आलोचना ही होती थी।

अब दोनो में कौन ठीक है कौन गल्त इसमें विजडम ‘विवेक’ भी कन्फ्यूज्ड है। क्योकि जितने  भी ‘सो काल्ड इंटेल्लैक्चूअल’ थे, एकता के नाम  पर तो भीड़ की तरह इकट्ठे हो जाते थे और धर्म के नाम पर बंट जाते थे, प्रसाद की तरह कभी नही मिले। वो शायद उस दिन एकमत हुए थेें जब घर  मे आग पूरी तरह भडकी थी तो सभी एक ही दरवाजे से ज़रूर बाहर निकले थे। वरना सभी की मंजिलों के रास्ते अलग अलग थे पर  फैक्टरी  एक ही  थी।
मैं यहॉ ये बता दूं यह दफ्तर जिसकी मै बात कर रहा हूं यह अगरबत्ती बनाने वाली एक फैक्टरी का दफ्तर है। और अपने प्रोडक्ट अगरबत्ती के हर पैकट के साथ एक ‘माचिस’
मुफ्त देती है। और माचिस की डब्बी का ब्रैडं
डेमोक्रेसी के नाम से बिकता है। और अगरबत्ती का नाम है “मै हूं ना”। जब तक अगरबत्ती अपना अहम नही जलाएगी तब तक खुशबू नही देगी। हर धर्म स्थान पर सुलगती है नही सही  शब्द – महकती हैै और खुश्बू बिखेरती है।

एक दिन पार्टी में दफ्तर के सभी लोग जमा थे।
चाय पानी ड्रिंक्स इत्यादी सभी था। ठहाके गूंज रहे थे।  ये समीर खॉन चुपके से उठे और अपने बॉस मि. धर  साहेब के कान मे हल्के से फुसफसाये ” तेरि मा कि.धर………..इंटॉलरेंस ” और अलग जाकर खडे हो गये। चुपचाप । फिर क्या था बॉस तो बॉस थे जो गालियॉ देना शुरू किये, मामला रोके नही रूक रहा था। सबकी नजर मे समीर खॉन साइलेंट मोड़ पर थे और हैं । और बास सबकी नज़रों में  इंटॉलरैटं। जाहिर है गाज बॉस पर गिरेगी। क्याेकि दफ्तर मे अगर चूहा भी मरेगा तो जवाबदेही बॉस की होगी। कर्मचारी की तो नही होगी। देश मे भी यही हो रहा हैै।
अच्छा अब इसे कोई धर्म का रंग न दे इस मामले में समीर खान  बहुत दिमाग रखता है। अब ये बॉस क्योकि दूसरे धर्म का है तो अभी कुछ दिन पहले अपने एक दूसरे साहब  जो  उनके अपने  के हैं जिनका नाम फारूख खॉ हैं, उनसे समीर की कुछ अनबन हुइ तो समीर खॉन ने अपने कुत्ते का नाम फारूख रख लिया। लोकतन्त्र है एसा कर सकते हैं।और लोकतन्त्र है दूसरा अन्यथा भी ले सकता है। किन्ही शब्दों में इसे 
आजादी  का दुर्पुयोग  भी  कहते हैं।
परन्तू इस दफा किरदार सीन से बाहर हो गया।
अगरबत्ती सुलगी नहीं जल गई। अब जल गई तो खुशबू भी नही रही। डब्बी में जितनी  भी  अगरबत्तीयॉ  थी  खत्म  हो  गयी,  और  माचिस  की  डब्बी  में  तिलियॉ  अभी भी  बची  हुई  थी।   
पर मुझे  मालूम है आगे क्या होगा। समीर खॉन जब भी कोई स्क्रिप्ट लिखते है तो परफेक्ट लिखते हैं।
जब उस पार्टी की वीडियो रिकार्डिग मुहैया कराई जाएगी तो समीर खॉन यही बोलेगे कि मैं अभी भी अपनी बात पर टिका हुआ हूं पर मेरे बॉस ने उसका गलत अर्थ  निकाला है।
दरअसल मेरी बेगम दक्षिण भारत से हैं । एक दिन असहनशीलता पर हमारी चर्चा हो रही थी।
बातों ही बातो मे मैने पूछा तुम्हारी भाषा में इसको किस तरह पूछेगें कि “कहॉ है (किधर है) इंटॉलरेंस “। पत्नी बोली “तेरि मा,  किधर  इंटॉलरेंस”।बस ईतनी सी बात थी  जो  लोगों ने तोड़ी, फिर मरोड़कर पेश की।

संदर्भ कैसे अनर्थ को पकडते हैं इसका एक उदाहरण मै आपको दे सकता हूं और मै इसका भुग्त-भोगी हूं।
यह जाने अनजाने मेरे साथ हुआ था। मै कही ट्रेनिगं पर था। जोक मजाक चल रहा था। अपनी एक साथी थी जो पैसे की डींगे हॉक रही थी तो मुझसे रहा नही गया तो मैने कहा आपके जैसी ही एक महिला थी करोड़पति रही होगी सो एक दिन एक प्रेस रिपोर्टर ये जानने के लिए, की आप इतनी अमीर कैसे बनी ? इन्टरव्यू  लेने  आया। शाम हो चली थी सो वो महिला बोली ” देखिए कहानी कुछ लम्बी है आप ने सुननी ही तो है क्यो न बत्ती बुझा कर बात की जाए। यानी जब तक मेरा ये तात्पर्य समझ आए कि आप ईतनी कंजूस है बिजली  का खर्चा बचाना चाहती हैं बीच में किसी ने “ओ…………करके जो ठहका लगाया बात का बत्तंगड़ हो चुका था। मैं भी स्तब्ध था।
अब बात वही थी स्थान और समय  गलत  था। पर मै उस दिन ये सोचने को मजबूर हो गया कि जो बात मर्दो पर तो लागू हो सकती है स्त्रियों पर भिन्न अर्थ रखतीं हैं। यानी अनर्थ हो सकता है। वो एक व्यक्ति की ‘ओ…..’ सारे तालाब को गन्दा कर गई। तबसे मै काफी रिज़र्व रहने लगा। उस दिन मुझे रामायण के उस धोबी की याद हो आई जिसके कहने पर सीता त्यागी गई थी। 
पर आजकी सीता घर छोड़कर चली  जाती है और त्याग पर बहस के लिए तैयार है क्योंकि वो इंटेलेक्चुअल भी है।

“मुझे खुद से नही़ं, आईने से डर लगता है,
एक एक को पहचानता हूं, पर समाज के  प्रतिविम्ब से डर लगता है।”

बात अगर बिल्कुल सही भी हो तो भी स्थान और मौका जरूर देख लेना चाहिए। दो दोस्त जगंल से जा रहे थे। रास्ते मे डाकूओं ने घेर लिया। पहला दोस्त दूसरे से बोला ” भैया  जो मैने तुमसे चलने से पहलें  दो लाख उधार लिए थे वो वापिस ले लो हिसाब चुकता।”

“तेरि मा” का मतलब यानी “कहॉ है “।
जोक ये था कि किसी मद्रासी ने पंजाबी से पूछा
मद्रासी : तेरि मा लालकिला
पंजाबी : तेरा बाप घण्टाघर।

इस पूरी घटना से शिक्षा क्या मिलती है?
शिक्षा :
एक आदमी भैंस बेच रहा था दो लाख रू की जिसका एक थन्न था, एक सींग एक टांग और दो पूंछ। किसी ने पूछा इसमे दो लाख वाली क्या बात है।
जवाब मिला “करैक्टर”.

साथियों मुझे आपकी प्रतिक्रिया/कमेन्टस् का इन्तजार रहेगा। टिप्पणीयों का अगले लेख में जरूर ध्यान रखा जाएगा।
जय हिन्द। 

 

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