Face book-चेहरों की किताब

         फेस बुक = चेहरों की किताब
फेस बुक बड़ा दिलचस्प प्लेटफार्म है। अपने दिल की बात खुलकर सबके सामने रख सकते हैं। आपको समस्याएं मिलेंगी उनके निदान भी मिलेंगे। अपेक्षा और उपेक्षा दोनो साथ एक ही पटल पर। सबको यह याद रखना चाहिए कि आप अगर फेस बुक पर कुछ डालते हैं तो ये पब्लिक डोमेन है। इसलिए ये ध्यान रहे कि आप जिस मूड में या जिस नज़रिये से कुछ पोस्ट करते हैं तो ये ज़रूरी नहीं कि सामने वाला आपकी सोच के अनुसार चलेगा। वो आपको अपनी मर्ज़ी  से या अपनी सूझ-भूझ से कुछ भी जवाब दे सकता है। हो सकता है न भी दे।
आपकी कोई निजी समस्या है या बातचीत है और चाहते हैं कि विशेष लोग ही टिप्पणी करें तो आप अपना एक  अलग ग्रुप बनाईए। वॉटस एप इस्तेमाल किजीए। किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। और नही तो फिर बर्दाश्त करने का माअ्दा
रखिए। कोशिश किजीए कि सभ्य भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण :
ट्रेन में एक व्यक्ति सफर कर रहे थे । रिज्रर्व सीट थी। तो कोई और सज्जन उनकी सीट पर आकर बैठ गये। गुस्सा तो आया पर तहज़ीब का भी तकाज़ा होता है। तो बड़े विनम्र भाव से उस शख्स की तरफ देखकर बोले “भाई साहेब आपके पिता जी का नाम क्या है? वह बोला श्याम लाल। तो जिन साहब की वास्तव मे सीट थी उनसे बोले
” कृप्या उठिए यह सीट श्यामलाल की नहीं है।”

अब यही बात अगर एसे कही जाए कि उठ जा ये सीट तेरे बाप की नहीं है। तो दो मिनट लगेंगे निपटाने में।

जनहित में जारी।

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