मैने वो सब सबक सीखे..

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मैने वो सब सबक सीखे, बर्दाश्त करने के
सुना अनसुना करना, ध्यान न देना,
दुस्वपनों से दूर
किसी एक सुनसान पहाड़ी पर
गुफा होना,
पर उन यादों का क्या करूं
जो अनायास चिकौटि काटती हैं

और
मैं करवट बदलता हूं
किसी सफे किताब कि तरह
फिर  धम्म से गिर जाती है नींद में
पलट देती है पुस्तक चुपचाप
बिस्तर मेरा।

मैं चौंक कर उठता हूं
उजाला है
ऑख मलमल कर देखता हूं
पर मुझे सवेरा नहीं मिलता।

मैने वो सबक भी सीख लिए
जो किसी ने सिखाए नहीं क्योंकि
जिन्दगी
सॉस लेने के दूभर तरीके
किसी प्रणाली से
सिखाती भी नहीं।

एक बच्चे की तरह
किसी ने मुझे गिरते देखा भी नहीं
अकेला था, मैं रोया भी नहीं।
अब वो कांधा भी हटाने की
कोशिश में है ये कायनात
जिसपर सर रखकर मुझे रोना था
मैं रोया भी नहीं।

अब मै वो सब सबक दोहरा रहा हूं
और मुझे भूलने की आदत सी हो गयी है
जिन्दगी खेलती सी लगती है,
अब वो
मुझे खलती भी नहीं।

मैने वो सब….सबक
नसीहतों में तबदील कर लिए हैं
और सीखा है
बिन मॉगे किसी को राय देना
बनता भी नहीं।

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