कल रात चान्दनी मिली, ठण्डक दे गयी, सुबह उजाला मिला, जिस्म जला गया।

कल रात चान्दनी मिली, ठण्डक दे गयी,
सुबह उजाला मिला, जिस्म जला गया।

अपने अपने हिसाब से सबने इस्तेमाल किया मुझे
इस्तेमाल तो चलन में था मै इत्तेफाकन मर गया।

*स्कॉच कैसे सम्भाले कर रखती है सुरूर बराबर सुबह तक

 मुफलिसी में सर भारी न हुआ,तो खुमार को मलाल हो गया।

  1. scotch*-अमीर शराब

hangover खुमार

क्या करें की दिल की बेकरारी को करार आए,
अन्धेरा सब देखना चाहता है सुकून नींद से गया।

कच्ची शराब से मतलब organic न समझना, युरिया नौशादर में मिलाकर दिया गरीब अच्छे* से गया।
*अच्छा=good=गुड़

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One thought on “कल रात चान्दनी मिली, ठण्डक दे गयी, सुबह उजाला मिला, जिस्म जला गया।

  1. Arjun Prasad Singh says:

    Aapke kabita me Zindagi ki zung hai toh tute huye dil ki awaz bhi hai. Bhut ke samskar bhi hain toh bhavishya ke kusamskaro ki chinta bhi hai. Lekhni ko prawahit karte rahe. Aasha hai ki aap ke kawita ki chap samaj ko aandolit karegi. Dhanyavad.

    Like

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