काफिर की कोई पहचान हो तो हमे भी बताना, मैं उसे देखना चाहता हूं उसे जानने से पहले।

ख्वाहिशे उतरने से पहले क्या कैफियत मांगती हैं
कि वो भटक तो न जाएगा वहन करने ले पहले।

बहुत दिन बाद जब कोई चेहरा लगा आईना देखने,
वो मन्दिर भगवान बदल चुका था जागने से पहले।

काफिर की कोई पहचान हो तो हमें भी बताना,
मैं उसे देखना चाहता हूं उसे जानने से पहले।

वखरियॉ गल्लां रुक्खे लोग, तैनूं की दस्सॉ  सुण मेरिये बिल्लो, दिल टोटे टोटे हो गया

​अब तो न जाने कि खूबसूरती का क्या नाम हो गया,
हमारे ज़माने की खुबसुरती का तो “टोटा” हो गया।

वो चाक ज़िगर वाले परेशान बहूत थे
कपड़ों की नुमाईश में कहीं टोटा खो गया।

टोटा – साहित्यक अर्थ किसी चीज़ की कमी होना।
२.आम बोल चाल में सुन्दर लड़की के लिए इस्तेमाल होता है ये शब्द।
३.तीसरे इसके माने cut piece में जो थान में बचा हुआ आखिरी ‘टुकड़ा’ मिलता है।

4.टोटे टोटे – टुकड़े टुकड़े

Unfolded mystery 

दुख से डरना कैसा वो तो दोस्त है अपना,
सुख से मन लगाना है तो दुश्मनी निभाते रहिए।

बन्द पन्ने किताब के, मुड़े तुड़े से फलसफे,
फिर वही पुराना किस्सा  घड़ी सा   घुमाते रहिए।

वक्त मेरे पीछे पड़ा है, मेरा क्या बिगाड़ लेगा,
अच्छे दिनों की उधारियॉ हैं, धीरे-२ चुकाते रहिए।

एक तीर छोड़ा है न जाने कहॉ लगे, इतनी हमारी किस्मत कहॉ कि वो खुद आके निशाने पे लगे।

वो ज्यादा से ज्यादा नाराज़ ही तो होगा,
चलो बात करके देखते हैं जो सोचा था एक बार पूरा तो होगा।

होड़ खूबसूरती की

अब तो न जाने कि खूबसूरती का क्या नाम हो गया,
हमारे ज़माने की खुबसुरती का तो ‘टोटा’ हो गया।

वो चाक ज़िगर वाले परेशान बहूत थे
कपड़ों की नुमाईश में कहीं परदा खो गया।

उम्मीद भी बड़ी वाहियात चीज़ है,खॉमखॉ भी बैठा है तेरे इन्तजार में।

उम्मीद भी बड़ी वाहियात चीज़ है,
खॉमखॉ भी बैठा है तेरे इन्तजार में।

सोहबते सिखाती हैं मगर धीरे धीरे,
इश्क की क्या बताएं, बस एक नज़र में।

वो तो पर्दे में था पर देख तो सकता था,
कि रुसवाइ देखी नहीं जाती उल्फत के पर्दे में।

जब से कांटा चुभा है मेरे पॉव में,
मछली का दर्द उभरता है तबसे मेरे ज़हन में।

इश्क में तकल्लुफ सज़ा नहीं होती,
रूसवाइयॉ भी शामिल है उसके नखरेनाज़ में।

  Un known relationship

मै किस नाम से पुकारूं तुझे,
नज़र मिलती है तो जैसे
कोई रिश्ता कायम हो छाप सा,
पलक बन्द होती है दिखता है
साफ साफ एक खाब सा।

बरसों मिलते रहे जिनसे
वो न तो पास था न दूर थे।
वो सफर में एक दिन क्या मिला
मैं अकेला न रहा जब मुझसे 
वो हुआ दो चार सा ।

वो लागत पूछ रहा था
मुझसे मेरे इन्तज़ार की।
इतना टूटफूट सोचकर चला था
ये खसारा करके भी कहॉ हुआ नुक्सान सा।

खसारा- घाटा