उसे रौशनी की ज़रूरत थी वो मेरे कमरे से उतारकर बल्ब ले गया। आज अखबार में खबर है, मेरा एक शिष्य एकलव्य हो गया।

उसे रौशनी की ज़रूरत थी
वो मेरे कमरे से उतारकर बल्ब ले गया।
आज अखबार में खबर है,
मेरा एक शिष्य एकलव्य हो गया।

खबर का क्या है
वो उसकी है जिसकी अखबार चलती है।
जबसे भेड़चाल चलाने लगी है अपनी
शतरंज के मोहरों का बुरा हाल हो गया।

कहने को चलती तो ‘आप’ की है
इसके केन्द्र मे कौन है,
मेरे तेतीस इधर तेतीस उधर
बीच में मैं
हिसाब ‘आप’ का बराबर हो गया।

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