समन्दर को तो बात सिर्फ सुनाने की है, प्यास तो चुल्लु भर है न मिले तो मर जाने की है।

समन्दर को तो बात सिर्फ सुनाने की है,
प्यास तो चुल्लु भर है न मिले तो मर जाने की है।

कई बार सोचा मलाल से पूछूं के ए कमजर्फ*,
वो खेत क्यों चुना जिसे चिड़िया चुग जाने की है।

अगर एतबार न भी हो, प्यार क्यों नफरत में बदले
सियासत हर हाल कमाती है और खबर चंडूखाने की है।

कमजर्फ-अयोग्य*

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