आज का विचार :                   Bull on the Street someone hits the bulls eye  in the bulls market    मुहावरा ‘सरकारी साण्ड’ का, शहर में अर्थ न जाने कोय।                 और इंडिया को भारत कहते हैं इन बच्चों को समझाये कोई।

मुहावरा ‘सरकारी साण्ड’ का, शहर में अर्थ न जाने कोय। 
और इंडिया को भारत कहते हैं इन बच्चों को समझाये कोई।

इस प्रश्न पर बवाल हो गया त्रिशूल कहॉ पर देखा तुमने,
इल्ज़ाम उस बच्चे पर आया जो नहीं जानता बैल की टॉग कहॉ पर होती है।

चलो ये मान लेते हैं कि तुम मुझसे ज्यादा रौशन,
तो कम ऱौशन चिराग की गिनती किन चिरागों में होती है।

तेरी साड़ी मेरी साड़ी से ज्यादा सफेद क्यों,
जब कुछ होम हो हवन में ये जलन सी क्यों ऑखों  में होती है।

स्वच्छ भारत अभियान में, क्या ‘झाड़ू’ इस्तेमाल
नहीं करिएगा,
‘झाड़ू’ नाम ससुरे का, बहू को बेपर्दा ये नाम लेने में दिक्कत होती है

झाड़ू लगाना, झाड़ू फेरना, झाड़ू का ही काम है क्या,
आम आदमी दुल्हन, केन्द्र में दुल्हा कौन, काजी को सेहरे से कौन सी दिक्कत होती है।

जयमाला यूं ही पड़ी रह गई, जंग कोर्ट में जारी है,
दो साण्डों की झगड़े में, सारे पण्डाल को दिक्कत होती है।

‘सरकारी साण्ड’ कहावत है जो न समझे वो दिल्ली का नहीं हो सकता,
आए दिन बीच बाज़ार मे जब दो भिड़ जाएं तो कामकाजी को दिक्कत होती है।

तू कौन है,मैं खॉमखा क्यों? मैदान कौन सा किस सण्डे का,
तेली का जब तेल गिरे, मसालची से कोई पूछे न कहॉ पर दिक्कत होती है।

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