आज का विचार

​मित्रों आज मैं भगीरथ पैलेस गया था कुछ खरीद-दारी करने। मुझे लगा कि दुकानदार दुखी होंगे। 
और मुझे जानकर ये खुशी भी हुई कि भुरि भुरि प्रशंसा तो वो लोग भी कर रहे हैं जो बीजेपी के नहीं हैं। दुकानदार भी ये कह रहे हैं कि बैंक में परेशानी हो रही है वैसे धन्धे में उन्नीस बीस का ही फर्क है। बस एक बात का सरकार को ख्याल करना चाहिए कि ये जो इन्सपेक्टर राज है वो खत्म होना चाहिए।

अभी कल ही स्थानीय निकायों के परिणामों में भाजपा की जीत हुई अब विपक्ष चुप है। अभी कपिल सिब्बल जी ने कहा ये  डिमुद्रीकरण मुस्लमानो के खिलाफ हैं। यानी किसी भी बात को कोई भी एन्गल दे दो। सिब्बल साहब पेशे से वकील है और इस बात से उनके पक्ष/पैरवी करने के स्तर का पता चलता है। क्या पाकिस्तान में या दूसरे मुस्लिम देशों में लोग बैक मे एकाउंट नहीं रखते है क्या।

मै किसी पार्टी विशेष का पक्षधर नहीं हूं। या महज किसी पार्टी के पक्ष में इसलिए नहीं बोलता हूुं कि मेरा मन बना हुआ है। ठीक है तो ठीक गलत है तो गलत । पर समस्या ये है कि मेरे  या आपके विवेक को कौन परखेगा। 

स्वच्छ डेमोक्रेसी में सुदृड़ विपक्ष का होना बहुत ज़रूरी है । विपक्ष को समस्या इस बात से नहीं की डिमुद्रीकरण से जनता को समस्या या कठिनाइ हो रही है। पर विपदा ये है कि अगर मोदी जी की ये योजना सफल हो गयी और उ प्र में भाजपा इलेक्शन जीत गयी तो विपक्ष का पाटिया बिल्कुल साफ है। ये जो ममता जी मोदी जी को जड़ से उखाड़ ने की शपथ ग्रहण कर रहीं हैं ये बौखलाहट है। बदहवासी है। और ये कोई भी नहीं चाहेगा कि विपक्ष बिल्कुल ही खत्म हो जाए। क्योंकि विपक्ष कमजोर होगा तो डिक्टेटर शिप को बढ़ावा मिलेगा। एसा विपक्ष भी नहीं चाहिए जो मुसीबत में इतना बौखला जाए कि जाके पाकिस्तान से सहायता मॉगे और कहे कि मोदी को हटाओ। 

अब आगे अभी जिन लोगों के कालेधन की कब्र खुदी है अन्दर ही अन्दर उनकी आत्मा पर प्रेत हावी होने की कोशिश में ज़रूर होगा। हर अच्छे काम में ज्यादातर बुरे लोग गल्त तरीकों से फायदा उठाया चाहते हैं। और वो कुछ हद तक सफल भी होते हैं। ये एक तबका है जो किसी का  नहीं होता और गिरगिट की तरह होता है रंग एसा बदलता है कि वो उसी का हिस्सा लगता है।

और संकट के समय वो सही गलत नहीं देखता बस जहॉ फायदा दिखे उसका होता है।
संजय गॉधी ने मारुति लाने की जब कोशिश की तो विरोध हुआ। बाद में वही मारुति अब पूरी तरह छाई हुई है। परिवार नियोजन जब आया तो वही गुट जो सिर्फ लाभ देखता है पकड़ पकड़ कर लोगों की नसबन्दी करने लगा। नतीजा कॉग्रेस हारी लेकिन एक मैसेज गया कि परिवार छोटा होना चाहिए। वो लोगों तक पहुंचा। और आज कारगर भी है। अब यही बात जुड़ती है कि इस देश में दुसरा धर्म भी है। जहॉ शादीयॉ करो बच्चे करो खुदा की नेमत है। वहॉ उसमे समय के  साथ बेहतर बदलाव नहीं हुए। जेहाद जो धर्म की सुरक्षा के लिए था टेरर आंतकवाद के साथ जुड़ गया। 

पाकिस्तान का जन्म मुस्लिम लीग मुस्लमानो को अलग बसाने के ध्येय से हुआ। आज पाकिस्तान का हश्र सबके सामने है। वहॉ हिन्दु सन संतालिस में १५ से १७ प्रतिशत थे आज दो प्रतिशत भी मुश्किल से बचे है।

हिन्दुस्तान में  देश की बेहतरी के लिए एक लॉ होना चाहिए। धर्म देहलीज़ के अन्दर। सभी विकसित देशों में एसा ही है। वहॉ कानून सबके लिए एक ही है। हिन्दुस्तान में जो पाकिस्तान का झण्डा फहराते हैं पाकिस्तान में तो आप किसी भारतीय की प्रशंसा भी करो तो गोली मार दी जाती है। विडम्बना है।

मैं ये सब इसलिए भी बता रहा हूं कि मोदी हो सकता है अगले चुनाव में हार जाएं क्योंकि गलत पैसे में ताकत बहुत होती है। उसकी जड़े जरा सा पानी मिलने पर बहुत जल्दी बड़ती हैं। मुझे मुंशीप्रेम चन्द जी की पंक्तियॉ याद आती हैं कि

“मासिक आय तो पूरणमासी के चॉद सा है जो पहली तारीख को पूरा दिखता है और पन्द्रह (पक्ष) तारीख आते आते लुप्त हो जाता है। और उपरि आय तो एक बहता हुआ स्रोत है जिसे जितना बरतों उसमें उतनी बर्कत आती है”।
तो तात्पर्य यही है विवेक जगाइये, भक्ति तो अन्धी ही होती है पर राजनिती नहीं। 

पागल किसी को भी थप्पड़ जड़ देता है भरे बाजार,
पर अपने को कभी नहीं मारता, ये विवेक है या विचार।

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