Happy New Year to all word press friends

​पुराने वर्ष परः एक विचार

आफताब की साफगोई तो उजाले में  है,
ये अँधेरा ही है जो चाँद से बदमाशियां करता है.
सुनते हैं संगत में लोग बदल जाते हैं 
कौन किसको बदलता है ये मीडिया बताता है.

कैसे बीता  वर्ष पुराना एहतियातन 
बुराई रही खूब उजागर सच पूरातन . एहतियातन।

कालाबाज़ारु चुप रहे गुर्गे बोलत जाहिं 
जो दब गए वो दफ्न तन दफतन, टन्न तनातन, एहतियातन।

गुजरात सा एक और गांव जला,
क्यों बंगाल में हो गया कंगाल आ-रक्षण, सन्न सनासन
एहतियातन।

कोई ‘कुमार’ न बोला उसपर, झोला लेकर,
सांप सूंघ गया उनको ततक्षण, ओ कुलच्छन 
एहतियातन।

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