बरसात समझती है ये सब एक छतरी के कारण हुआ,                              पूरी कायनात लगी थी जब ये करिश्मा हुआ था।

भरी बरसात में पानी से बचने के तेरे वोह बहाने,

फिर एक छतरी के नीचे जमकर फिर भीगे दो दिवाने।

एक ही बिस्तर पर उसकी यादों के सहारे,

चादर की तरह कितनी करवटें बदलती हैं बिछोहने।

कच्चा कलुआ (मसान)

आज का विचारः श्मशान से कब्रिस्तान के बीच 
आबादी में वोटो का आह्वान*।

मरना है तो श्मशान या क़ब्रिस्तान में थोड़े मरना है 
कितनी बार कहां-२ मरा था बस इकट्ठा कर
“अबकी बार मेरी सरकार”इसी वैन्यू पर बस आखिरीबार मिलजाना है।

जिसको जाना है मृत पड़ा है, वक्त नहीं है सब कामों को शाम से पहले निबटाना है,
मैयत पर भीड़ कितनी है रैली देखकर बोला प्रचार “इसे कहते हैं जग जीतकर जाना है।”

आह्वान*=पुकारना या
पूजन, यज्ञ आदि के समय देवताओं से यह कहना कि आप यहाँ आकर अपना भाग और हमारी सेवा पूजा ग्रहण करें।

 

कैक्टस पर फूल जब आया होगा,     सरापा प्यासे से मिलकर आया होगा। सहरा को ओस की बूंदो ने,            हरी घास पर बैठकर पानी पिलाया होगा।

कोई तो  दुश्मन हो मेरा इस ग़मख़्वारी*  में 

कोई तो दोज़ख से निकाले मुझे जन्नत के लिए.

जितने दुश्मन थे मेरी रुखसती के वक़्त सब दोस्त हो गए,

मरा है आज तो कुछ तो छोड़ गया होगा वसीयत के लिए.

*ग़मख़्वारी condolence 

सरापा miraz

सहरा Desert

अन्धेरा बहु-मूल्य है। रौशनी इसी की कोख में जन्म लेती है।

तुम्हारे पास तुम्हारा क्या है, खालीपन में याद हो  आया, उसने जो सब सँजो के रखा था तीन दो एक मैं शून्य तक हो आया।

अन्धेरे में शान्त अकेला सा जो किसी को दिया नज़र आया,
और सब्र में जलता हुआ  जैसे कोई आँख मलता हुआ बाहर आया।

मैं इस भुखमरी को क्या नाम दूंःःः

वो ज़ख्म भी इतने खूबसूरती से देता है,
के हम उन्हे सजाते न तो क्या करते।

मैने ये जाना कुदरत करिश्मे एसे भी करती है,
सुबह दिखाने है ज़ख्म, रात सहलाते न तो क्या करते।

ये आना जाना तो ज़िन्दगी का है गमों का नहीं,
जो सदा साथ रहता है साथ उनका न देते तो क्या करते।

वो सड़क पर है लोग समझते है किसी सफर पर है 
वो मांग कर गुज़र कर रहा है सफर का खुलासा करते भी तो क्या करते।

तू ही सूरज का हर शाम डूबना देखता है, भटकता खुद है इल्जा़म आफताब के सर धर दिया।

चाँद को चाँद कह दिया, उसने सुना ही नहीं,
चन्द्रमुखी नाराज़ है गैर को क्यों चाँद कह दिया।।

पारो को चाँद देव दास में मिला, जब न मिला,
उसने उलाहना भेज शिकायत भरी बदरी से कह दिया।।

जिसके पास न था, उसी के साथ हमेशा रहा,
दिल हमेशा सोचता रहा, मन जब हुआ उठके चल दिया।

Don’t play with fire : Happiness like crackers​

जहां से रौशनी आ रही

वहां से मत आना,

अंधेरा जल रहा है

संभल कर,  आ  ना।
मुझ से जुड़ें

मेरी आग से न जुड़ने लगे।

आग लपेट लेगी,

सँस्कार देता हूं, दाह*  ना।
Dah* This word is used for when you are in a state of annoyance, or something happens that wasn’t intended.

Russians used differently