मौका परस्त हो चला है मोक्ष बहुत, तेरा साथ भी चाहता है तन्हाई भी, आरम्भ में देखना चाहता है         उदय के  साथ अस्त भी।

तेरी तस्वीर मेरी आँखों के आगे तैरती रहती है,

वजह ढूँढना बेमानी है उनका मेरी आँखों में होना तेरे बिना। 

मैं अकेला ही चला आया हूँ ऐसा भी नहीं है 

सब अपनी अपनी वजह से मेला बनाए हैं मिले बिना ।

अकेले में गहराई कितनी है कभी माप के देखी है 

भीड़ में ठगी सी है तन्हाई बहुत मिलती रही सबसे तेरे बिना।
बीमा कराना है पहले हित* पैदा करो,

तेरे मतलब से मेरा मतलब स्वार्थ नहीं है।

*Insurable interest

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