बहुत शोर सुनते थे सीने में दिलका, सही बस एक बार धड़का, फिर धड़का न धड़का।

वो जिनकी नींद बिगड़ी है उनको शिकायत है शोर से,
ये खलिश* सी खलल में आती कहां से है।

*टीस/चिन्ता।

सिफत की मत पूछ मै जैसे तैसे ढल जाता हूं,
शरीर छूटता नही है ये मुक्ति आती कहां से है।

इस नम ज़मीन पर लोग उगाने लगे हैं वीराने,
जन्नत नसीब जिहाद से होगी, बच्चे के दिल में ये बात आती कहां से है।

कुछ बच्चे लड़ रहे थे आपस में, देखकर मन हुआ छुड़ा दूं,
पर मेरे ज़हन ने टोका तेरा विवेक न काम आएगा।

फिर सोचा वो तो थक के कुछ देर में खुद ही बैठ जाएंगें 
बड़ों का महजब बीचबचाव में दंगा करवाएगा।
…………

जब खीर गर्म थी मुंह जल गया कइयों का,
ठण्डी हुई तो उसी में मिला स्वाद सवइओं का।
Quote from holy book
“शराब पी,      दोज़ख में जाएगा”
जो जल्दी में थे शराब पीने लगे
अन्तराल इतना था दोज़ख तक पहुंचे ही नहीं।

कबीर कहते हैं तू पूजे पाथर तो म़ै पूजू़ पहाड़
           चाकी पाटन पूज ले, पीस खाए संसार।
और आगे कहते हैं
ता चड़ि मुल्ला बांग दे, बहरा हुआ खुदाय।
आज कबीर होते तो किसी न किसी फतवे के मातहत होते।

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