मेरे ग़मो की तुझ से क़ुरबत* रही, वर्ना कबके हम ख़ुशी से मर न जाते।

मेरे ग़मो की तुझ से क़ुरबत* रही, 
वर्ना कबके हम ख़ुशी से मर न जाते।

बस उस एक टयाले^ पर आराम मिला,
बीच में पड़ता था घर से मन्दिर आते जाते।

दिल साफ हो तो इबादत के तरीके नहीं देखे जाते,
इश्क सब कुछ निगल चुका था महूरत# बताते बताते।

^ट्याला-चबुतरा या टीला जहां बैठकर पथिक चैन की सांस लेता है।
*closeness

#शुभ समय

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