‘Pressitude’                 आजकल नखरा नहीं attitude बिकता है,                                   जो चाहो उगलवालो इन्हे नोट मार मारकर।

धन्धा बुरा नही जहां होड़ लगी हो पत्थर बाजी के इलावा भी,
मैं तरो-ताज़ा गालियाँ बेचता हूं चाहे देख लो आजमा कर।

वो कोठे पर खड़ी हो कोई pressitude जैसे 
ग्राहक कोई दरवाज़े पर दस्तक दे रहा हो अखबार मारमार कर ।

परदेस तक म़े चर्चा है वो परदे के भीतर भी nude नहीं है 
बिना चैनल के ये कौन सी फिरदौस है ज़रा संभल देख-भाल कर।

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