Nepotism v/s kangana

Nepotism कुलपक्षपात या भाईभतीजावाद 

कोई नयी बात नहीं है। पर अगर बहस छिड़ी तो जो शोशित है उसकी जीत होगी क्योंकि उसके पास उसकी कला के सिवा कुछ भी नहीं है देने को या दिखाने को।

महाभारत में करण इसी शोशण का एक उदाहरण है। 

पर फिल्म इन्डस्ट्री के करण अब खुद को        द्रोण-(Drone) आचार्य समझने की भूल कर बैठे हैं।

और एक और एकलव्य का अंगुठा काटने कौशिश की गई है।

आपने बचपन में एक वाक्य सुना होगा गाया होगा।

“टेसू मेरा यहीं अड़ा, खाने को मांगे दही वड़ा।

दशहरे और लोहड़ी मे बच्चे गाते हैं. इस टेसू की कई कहानियां हैं। उनमे एक ये है कि ये भीम का पौत्र था। कोई कहता है इसी का नाम बवरूभान था और बड़ा पराक्रमी धनुर्धारी योद्घा था। महाभारत युद्घ के वक्त ये कृष्ण को मिले तो कृष्ण ने पूछा तुम कहां जा रहे हो तो टेसु ने कहा महाभारत का युद्ध देखने जा रहा हुं।जो हारेगा उसकी तरफ हो जाऊंगा। कृष्ण ने परीक्षा लेने के उद्देश्य से कहा क्या तुम एक तीर से इस वट वृक्ष के सभी पत्ते गिरा सकते हो। टेसु ने कहा बस इतनी सी बात और तीर चला दिया। देखते ही देखते सारे पत्ते ज़मीन पर आ गये। कृष्ण ने कहा हम प्रसन्न हुए तुम्हे कुछ चाहिए। टेसु क्षत्रिय था। बोला हम दान में कुछ नहीं लेते। आपको कुछ चाहिए तो हुक्म किजीए। और यहीं कृष्ण ने उसका सिर मांग लिया।क्योंकि कृष्ण जानते थे कि सत्य की जीत होगी और हारते हुए कौरवों की तरफ बवरूभान गया तो कौरवों को कोई हरा नहीं पाएगा। और बवरूभान ने अन्तिम इच्छा ये ज़ाहिर की कि मुझे युद्ध देखना है। तो उसका सिर वृक्ष की चोटी पर बाध कर रखा गया। कहते हैं महाभारत का पूरा युद्ध तीन जनों ने देखा था। एक संजय जिनको दिव्य दृष्टि मिली हुई थी। दूसरे हनुमान और तीसरे टेसु यानी बभरूभान।
तो आजकल  करण जौहर की की माडर्न टेसु में गणना की जा सकती है कि “टेसू की गर्दन भले ही कट जाए पर वो ताड़ना नहीं छोड़ेगा”।

कर्नाटक का एक और नाटक 

भारत माता की जय

  कर्नाटक का एक और नाटक 
अपने प्रदेश का एक अलग झंडा रख सकते हैं कानून मना नहीं करता ।ऐसे तो एसी अनगिनत चीज़े है जिसमे कानून कुछ नहीं कहता तो कर दिजीएगा क्या? बड़ा ताज्जुब है। दरअसल ये राज्य-झण्डा कल क्या रूप ले लेगा इसका अन्दाज़ा नहीं है।
बहुत कुछ है देश में करने को कोई और मुद्दा उछालो यारों,

एक शादी की, दूसरी करनी थी अब हम काफ़िर न रहे यारों।
देश में कोठे (prostitution) legal है।कितने लोग   खुल्लम खुल्ला जाते हैं ? या कौन परिवार इजाज़त देता है? जबकि red light area legal है । 
ऐसी सोच जो आपके विचारों को विघटन की ओर ले जा सकती है उसको पनपने नहीं देना चाहिए। मुझे अब भी याद है बचपन में हम घर में रामायण पढ़ते थे और महाभारत भी पढ़ा। पर महाभारत ग्रन्थ हमें घर में रखने की मनाही थी।

ये बिल्कुल ऐसे है जैसे जिस घर में बच्चे हों वहाँ कैक्टस नहीं लगाने चाहिए।

मैं खुद से नाराज़ हूं ए ज़िन्दगी, तूने भी मुझे बिताया कैसे है।

उसे मालूम है आईना किसी और से कुछ न कहेगा,
पर उसे ये तो बता देगा कि अपनी बात रखनी कैसे है।

जो आईने की शर्तें afford नहीं करते उन्हे वो अल्हड़* बना देता है,
कि भोली को कोई ये तो बतलाएगा दामन पर चोली रखनी कैसे है।

अलहड़=भोला, दुनिया दारी न जानने वाला।

​आज का विचार : खेद हैअमरनाथ में कुछ यात्रियों की घात लगाकर हत्या  

अभी अभी कुछ लाशें गिरी हैं 

अभी कुछ कीड़े निकलेंगे अपने-२ घरों से।

अभी कुछ खबरे आएंगी,

तुम ये तय करना कि 

खबर सुनाई जा रही है या बेची जा रही है।

सबसे बड़ी बहस होगी

कि मरने और मारने वाले को क्या नाम दूं।

लाश लाश में फर्क देखा है क्या तुमनें कश्मीर में देखा है।

गर हिन्दु का है तो पैसे न देकर उसे जलाया जाए,
सवाल यही तो है कि जनाज़ा किसका का है।

लालटेन में सुराख रख छोड़ा है हवा के लिए।                                   सांस लेना दूभर है आँधी बुझा रही है।।

ये किसने एक लकीर खींच दी 

लगती तो बीचों-बीच है,

फिर भी ये तो बता दे 

तू किस तरफ ज्यादा है।।

मैं कहां कम थी बता

मैने ख्याल रक्खा है तेरा

ख्याल का वज़न नहीं होता

वो बराबर है ये मेरा वायदा है।।