माँ कहूं या वन्दे मातरम्                   अपनी अम्मी जान के लिए।

अब इसमे से निकलेंगे शायद

दिनकर, प्रसाद कबीर-ओ-तुलसी

या कोई निराला अवसाद लिए।

चुनौती अब भी वहीं खड़ी है

किसी विशुद्ध आहवान के लिए।

मां कहूं या वन्दे मातरम

अपनी अम्मी जान के लिए।

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मौत को वरदान है वो बहाने से आती है वजह से नही आती।

मौत की वजह ढूंढते हो वो वजह ही तो नहीं देती,
इतनी इकरस्ता है कि वो दूसरा रस्ता नहीं देती।

ज़िन्दगी में खेलना पर जिन्दगी से मत खेलना
वो शतरंज होती है जो बिन बताए मात नहीं देती।

कुछ मैने कही जो गुलज़ार नहीं है……….शायद कांटों पर लटकी ओस-आस की बूंद कहीं है।

प्यार एक तरफ़ा भी होता है 
तुम्हे मालूम है क्या ,
किसी  को  साथ लेकर मरना 
प्यार में  क्या जरुरी  होता  है 

मैं फिर पूछता  हूँ 
ये  अधूरा क्या होता है ?
किसी पे मर जाना भी 
कहते हैं पूरा होता है ।

ये सवाल था अपनेआप से
किनारा कौन कर जाता है।
अधूरा कुछ नहीँ छूूूटता प्रीत मेें,
जो आया है एक दिन पूरा रीत जाता है।

Thought of the day

“मेरे डेरे पर आना”

और

“मेरे अड्डे पर आना”
पहली से दूसरी पंक्ति में वर्षों का अन्तर है।
आदमी बदलता है शब्द बदलते हैं।
अक्सर देखा है शब्द अपना अर्थ बदल देते हैं।
इसमें शक्ति है जो श्रद्धा को convert करती है ।
जो कन्वर्ट करता है उसे कनवर्टर अर्थात बाबा कहते हैं ।

ये बाबा आजकल पावर हाउस की तरह काम करते हैं। इनका मैनेजमेंट बड़ा सुदृढ़ होता है.
सुबह शाम फ्री लंगर होता है । वास्तव में भोले भाले, गरीब और बेरोज़गार लोगों को लगता है कि उनको खाना फ्री दिया जा रहा है। वास्तविकता इससे भिन्न है। उनको पता ही नहीं है कि सारा दिन वहां ये लोग सेवा के नाम पर काम करते हैं।

विडम्बना ये है कि अगर आप किसी को यह कहकर बुलांए कि दिनभर काम किजीए आपको सुबह शाम खाना फ्री देंगें। तो कोई नही आएगा।
और यही श्रद्धालु इस पावर हाउस का वोट बैंक है जो 

इस देश में डेमोक्रेसी चलाती है। और जिनका मुखिया एक बाबा होता है। जो धार्मिक सेंटीमेंट्स के साथ अपने हिसाब से खेलता है।
इसकी बिसात में सभी सरकारें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त हैं।
इसके हटने के बाद इस वैक्यूम को कोई और भरेगा .
और हम तुम फेस बुक पर ऐसे ही वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेते रहेंगे.

और ये देखकर खुश हो लेंगे कि कितने like comment और share click हुए ।

Qed
problem solved
When there is hell
Then hell with it.

आईना अपने हिसाब से सूरत दिखाने लगा है,   दुश्मन को  दुश्मन के दुश्मन पर प्यार आने लगा है।

F  A  C  E  –  B O O K 
    CRITICS ARE ALWAYS ONLINE 

    when All lines ARE busy now 

    they say dont play A song
एक आदमी चौराहे पर हलवाई की दुकान पर मिठाई खा रहा था । वहां से गुजरते हुए दूसरे व्यक्ति ने कटाक्ष किया “शर्म भी नहीं आती है देश जल रहा है और मिठाई खा रहे हैं”। 

तो हलवाई बोला “अच्छा आप उस ग्रुप के है आईए आप भी आईए सर ये तो बाबा के पकड़े जाने की खुशी में मैं फ्री खिला रहा हूं।”

इश्क में तरफदारी नहीं होती, जिन्हे शिकायत है उनमें समझ नहीं होती।

ये इश्क है काहे इतना confused हो,

ये बस हो जाता है परिभाषित* नहीं होता।

*Define 

जैसे कोई खाली बैठा हो और फुर्सत से इनाम लेने नहीं जाता.
*मजनूँ लैला की गली में घूमता है क्या वो खाली कहलाता है?

लैला कभी कभी खिड़की खोल के गली में देख लेती है

कौन इसे फुर्सत कहता है।

वो हाशिए पर है उजाले के, क्या इत्तेफाक है अन्धेरा भी यही सोचता है.

लौ बुझानी पड़ी पतंगे को देखकर,
मैं जिस हाल में हूं, वो जल मरेगा।

ये वो रिश्ता था जो पूजा गया था,
हुनर शफा है, उनसे बचना है जो इसे बाज़ार करेगा।

पता सबको है पर कहानी का अन्त पूछता फिरता है
पर बीच में जो कहानियां है उसमें तेरा किरदार कौन करेगा।