A word on its extinction “टोटा”

“टोटा” शब्द एक अदभुत शब्द है लेकिन आजकल ये शब्द extint हो गया है। अपना अर्थ और इस्तेमाल खोता जा रहा है। 
इसका प्रचलन थोड़ा कम हो गया है। मैं इसे मरने नहीं दूंगा.

टोटा का अर्थ है घाटा होना, चुभने वाली कमी होना
टुकड़े-२ होना जैसे टोटा चावल होना। गरम कपड़े का टुकड़ा जिसे औरतें पहनती हैं ‘चादर’। थान का आखिरी पीस।

और दिल्ली की भाषा में ये शब्द खूबसूरत लड़की के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

देखें मेरा ये शेर आप के ज़हन में किन मायनों में उतरता है ।

“अब तो न जाने खूबसूरती का क्या नाम हो गया,
हमारे ज़माने की खूबसूरती का तो ‘टोटा’ हो गया”

बॉलीवुड में इसका इस्तेमाल मेरे ख्याल से मात्र
एक गाने में हुआ है &nbsp
अखियाँ लड़ी…………
अबके मिली वो बीच बाज़ार, मुझसे वो बोली  पहली बार
दिल टोटे टोटे हो गया।
बरसों किया मैंने तेरा इंतज़ार 
तब न किया तूने इकरार
दिल टोटे टोटे हो गया, जी दिल……

शायद हँस राज हँस जी का गाया हुआ है
फिल्म बिच्छू के लिए।

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अकेले पींग बढ़ाने में और झूल जाने में,मुश्किल है पर असम्भव नहीं है।

मुझे खुद से आजकल प्यार नहीं है
उस चोट का इलाज है पर करवाना नहीं है।
छत्ते में शहद तो है
पर डर कर हाथ डालना नहीं है।

वो तोड़ कर ले गया फल (खाब)सारे
बहुत आसान है झूल जाऊं रस्सी के सहारे
उसे भी नींद आ ही जाएगी गर “पालना” नहीं है
रस्सी ले तो गया था कि पींग बढ़ाएंगे
ज़िन्दगी एक बार धक्का भी ज़रूर देती है
जिस पैण्डुलम को  ‘घड़ी की टिक टिक ‘
झिक झिक लगने लगे
उसको अकेले कैसे पींग बढानी है
कि कला का पता नहीं है।

मुझे परेशान करता है….

ओ खुशी तेरा अचानक आ धमकना
खिलखिलाकर हँसना और चले जाना
मुझे परेशान करता है।

ये सफर जिनका रुखसती सा है,
हर वक्त तेरा काँधे पर सवार रहना
मुझे परेशान करता है।

रोने की कोई उम्र नहीं होती
हँसने की होती है
तेरा यूँ हिसाब लगाना
मुझे परेशान करता है।

किराएदार बन के आई है
या तो तू कब्ज़ा कर,मुआवजा दे,
तेरा यूं फ्री में मुझे हथिया लेना
मुझे परेशान करता है।

A beggar’s statement

A beggar standing in front of a  Fashion Designer Showroom thinking something

Tag line “कपडे़ इतने महंगे भी हो सकते हैं देखकर एक गरीब कुछ सोच में पड़ा है।”

कि एक कैमरा उसकी तरफ घूमा सामने रवीश कुमार खड़ा था।

माईक बीच में रखकर पहले उसने उसे गले लगाया फिर अपना बनाया था।

प्यार से उस गरीब से भूमिका बांधी

पौषाक कौन है? या पौषाक क्या है?

फिर पूछा इनमें से सही क्या हैः

1.पौषाक वही है क्या आदमी बदल रही है?

2.पौषाक वही है क्या आदमी बदल रहा है?

3.पौषाक चला रही है, क्या आदमी गिर रहा है?

गरीब आदमीः (जिसकी गैरत जागी हूई थी और व्यंग के माने समझता था) बोलाः

मुझे मालूम है तुम्हारा अगला प्रश्न क्या होगा। मोदी की कसम सच में मै

“इतने छेद करूंगा कि भूल जाओगे कि मेरी में ज्यादा हैं या

उस डिज़ाइनर ड्रैस में………”

कट कट कट 

Thought of the day: O Sun Ray   ओ सुन रे।

“कान खींचना” खींचे हुए कान से मुझे याद अाया कि “गिरे हुए दूध पर सारी ब्रम्हाण्ड भी रो ले तो वो लक्ष्य पर वापिस नही आ सकता, पर गिरी हुई शराब चाटने से मयकश की शिद्दत का पता चलता है।