एक तन्-दूर है,                                  सर पर सिन्दूर है।

लौ पर सर पटकने से रौशनी नहीं मिलती,

पतंगा तो प्यार मे अन्धा है, क्या रौशनी भी अन्धी है।

पुरानी किताबों में कुछ खत मिले तेरे,

जैसे मजबूरियों केे सौदे हों और कागज़ पर सन्धि है।

ये दुनिया अब एक बीहड़ जंगल हो चुकी है,

अस्तित्व वही सुरक्षित है, जो पिंजर में बन्दी है।

किसी ने कहा था….. एक बार किस्मत ने किसी का दरवाज़ा खटखटाया। वो घर पर नहीं था।वो पड़ौसी के यहां बैठे हुए अपनी बदकिस्मती की कहानी सुना रहा था।

मैने मुकद्दर की बात मान ली होती, इक बार ज़िद तो उससे की होती,

बहला फुसलाकर भी कुछ काम चलाया होता, लहरें जो पत्थर से न टकराई होती।

किसी तरीके से वो न उखड़ने वाला था, गर पैरों तले से उसकी ज़मीन न खिसकाइ होती।

पागलपन और मोक्ष में सिर्फ एक कदम का फर्क होता है। To get perfect ten your fall should be perfect while landing.

पागलपन और मोक्ष में सिर्फ एक कदम का फर्क होता है। 
You are just one step behind in madness, to achieve ‘Moksha’
To get perfect ten your fall should be perfect while landing.

अतीत की दीवार पर टंगे mirror को तोड़कर एक खिड़की बनाते हैं,          आज बाहर से भीतर नहीँ, भीतर से बाहर एक corridorबनाते हैं

वो चारासाज है नब्ज़ छूकर बुखार बता  देता है,
और नादान भी है कलाई थामकर हरारत बढ़ा देता है.

मैं क्यों मौन रहता हूँ  जब सुनते हैं  वक़्त सुनता है       & पर मुसीबत में, बुरा वक्त भी इत्तिला कहां देता है।

मैं जब बिछ गया उसकी गली में,       मेरी आवभगत में सिर्फ रकीब ने मुझे बिखरा हुआ पाया।

When people start reacting 
Like a seed one day they blossom by responding

प्यार प्यार होता है 
उसकी व्याख्या नहीं हो सकती 
शब्द चापलूसी करने लगते हैं।

विचार फिर भी उभरेंगें। कूची फेर कर देख ले चाहे।

मैं कविता सिखाता हूं 
जी हां मै कविता सिखाता हैं।

बच्चा गर कोई गिर जाए तो उस पल को अनदेखा कर देना,
ये प्यार ही है जिसे पुचकार कर रोना सिखाता हूं।

मैं कविता….

हुबहू याद है शब्द दर शब्द बिछड़ना तेरा,
मैं गुज़रा हुआ हर महीन लम्हा पकड़ना सिखाता हूं।

मै कविता…

एक एल्बम सा कैसे लपेटना है अतीत को बिस्तर पर,
किस तह फूल रखने हैं किस करवट कांटे, सहेजना सिखाता हूं

मै कविता…

शयन कक्ष की उस कुर्सी पर आँख मूंदकर बैठना कभी,
ध्यान की किरण से जब अंकुर फुटे, उन्हे नम आँखो से सींचना सिखाता हूं।

कुछ दिन बाद कुछ सालों में एक नज्म उभरेगी,
बच्चे तू शेर बन ये कहते कहते गज़ल करना सिखाता हूं।

क्या सच में कविता सिखाई जा सकती है,
हवा महसूस होती हुई दिखाई जा सकती है
बेहतर है ज़माने की खाक छानकर लाना, चुटकी में खाक को गुल* करना सिखाता हूं।
गुल-फूल, गायब करना।

​All Netas should come under product act 

All Netas should come under product act 
राजनीती भी अजीब खेल है. थोड़ा सा पार्टी चंदा लेने में तकलीफ हो रही थी तो पक्ष विपक्ष एक हो गए विधेयक पारित हो गया. मतलब वो विधेयक आसानी से पारित नहीं हो सकता जिसका क्रेडिट आपको  अकेले ही मिल रहा हो. 

जैसे MLAs की सैलरी बढ़ानी हो एक बैठक में पारित. बैंक की हो तो अगले सेटलमेंट तक पारित हो जाये तो गंगा नहाये समझना. उन्हें कमजोरी पता है कहेंगे हर बैंक/पार्टी अपना-२ प्रपोजल लाये. तो ऐसे एक बार राजनैतिक पार्टयों को ऑप्शन दे फिर देखते हैं कैसे एक बैठक में  बिल पारित होता है.
पालिसी है डिवाईड एंड रूल.
पर लीडर किसी यूनियन का हो या राजनैतिक पार्टी का कभी घाटे में नहीं रहता.

(Its a proven fact चंदा घटाओं सा बरसा है तो घोटाला है) 

अब कभी कभी सोचता हूँ चुनाव आयोग से सिफारिश करूँ कि हर नेता या पार्टी एक 
प्रोडक्ट एक्ट के अंदर आना चाहिए जब इलेक्शन हों.

नेता को वस्तु समझ कर चुनाव में बिकने से लेकर विज्ञापन तक बस अपनी अपनी तारीफ  उपलब्धियां गिनवाने का अधिकार हो जिसमे कानून हो आप दूसरे प्रोडक्ट की बुराई नहीं कर सकते हैं. आप के पास सबूत हैं तो कोर्ट में साबित कीजिये पब्लिक डोमेन में नहीं. अगर ऐसा हो जाये तो मेरे ख्याल से किसी भी पार्टी का भाषण ज्यादा से ज्यादा आधा घंटा रह जायेगा.

और ध्यान रहे Bagpiper Soda सोडा ही करके बिके क्योंकि शराब शरीर के लिए  हानिकारक है.