Butterfly

खूबसूरती पर पहरा बड़ा है

इतना कि उसे कैद रहना पड़ा है।

आज़ादी से उड़ तो लेती है तितली,

हर मौसम का दवाब उसपर भारी पड़ा है।
दो दिन की ज़िन्दगी में, ज़िन्दगी तो खुश थी,

तितली को तो मुसलसल* मरना पड़ा है।

*के संबन्धित परिणाम में

या लगातार

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My drawing room says: Nothing moves except hanging clock. In one minute you can die or kill sixty seconds.

 Time ask me : Who are you? Define yourself.

I said : One second, one minute, an hour wait!

वक्त खुद एक आवाज़ है, वो गुम जाता है आवाज़ से पहले।

I believe in stability but no you are not stable.

And yet you exists, although we are perishable.

समय तुम बदल गये हो। बदलते रहते हो।

मै उसी घर में रहता हूं जिसकी हर घड़ी में तुम रहते हो।

घड़ी घड़ी में तुम ही बतलाते हो,

तुम्हारी भी तो घड़ी-२ में, घड़ी-२ का फर्क रहता है।

ठिकाना तुम्हारा है पर ठौर कोई नही रहता है,

समय जिसका पूरा हो गया है,

वो भी पूरा होना नहीं चाहता है।

किसी को किसी के लिए बिना मतलब के

कोई टाईम नहीं है,

वक्त जब आएगा न

अगर कुत्ते वाला आएगा

तो दिन ज़रूर बदलेंगें।

वरना कितने भी अच्छे दिन क्यों न हों

तू कुसता रह जाएगा।

वक्त,

उसकी तो फितरत है बदलने की है,

जैसे नदिया का पानी बहता है, बह जाएगा।

गधा सावन म़े भूखा ही रह जाएगा।

क्यों, क्योंकि जो घास उसके पेट में है

उसे दिखती नही

और मुड़कर देखा मैदान हरा है

बोला ‘ये तो छूट गई’ कहकर गधा पछताएगा।

कुछ एसी लौ जगाओ जो प्रकाश दे और शीतलता प्रदान करे, इसबार दिवाली पर।

याद रहे रौशनी अपना रास्ता पानी में, अन्धेरे में जो बनाती है सच तो ये हे कि कोई हवा में नहीं बनाती है। मेहनत करती है अपने को हवन में आहुत करती है। ये धुआं आपका फैलाया हुआ है जो केवल अड़चन है उस प्रकाश को फैलने से रोकती है आपके द्वारा निर्मित बड़ी बाधा है। आप ही इसके निवारक हो सकते हैं.

चलो कुछ अन्धेरा जलाएं
इस बार दिवाली पर।
इस बार पटाखे न जलाएं
ये जागृति लाएं दिवाली पर।।

कोई कानून ही आंखे खोलें
क्या ज़रूरी है हर बार दिवाली पर।
सृष्टि में योगदान चाहिए
 इस बार दिवाली पर।।

दृष्टिकोण भी साफ चाहिए
इस बार दिवाली पर,
कुछ साफ-सुथरी हवा चले
इसबार दिवाली पर।।

दीपावली की शुभ कामनाओं के साथ
माँ लक्ष्मी कृपा बरसाएं।

हवा का नुकसान कम, अन्धेरे का ज्यादा
जो भी फायदा मिले फिर कर लेंगे आधा-२ 

आपकी दिवाली प्रदूषण रहित हो इन्ही शुभकामनाओं के साथ
दिवाली मुबारक

Happy deewali

इस समय वक्त मेरी मुट्ठी में है। ये भ्रान्ति है या अभिमान।

कुछ भी कर सकता है –   ये वक्त सबसे बड़ा बलवान।

समय ही सही निकला, हमीं गल्त साबित हूए 
हर बार। 
अबके मार अबकि देख,अबके बार किसकि सरकार।
न सखि साजन न जनताजनार।।
उसकी लीला अपरम्पार।।

केवल वक्त, वक्त पर है
बाकी सब न वक्त से पहले न वक्त के बाद
विसंगतियों ने किया व्यभिचार, 
वक्त से पहले घड़ी खराब।
न पत्ती चली न पट्टीदार*
उसकी लीला अपरम्पार।।
(*. १.संपत्ति या ज़मीन में हिस्सेदार व्यक्ति  2. बराबरका हकदार।)

…………………

मेरी चुप्पी निशब्द चली,

तूफान थमने के बाद।

सारे पर्दे उठा दिये थे

उसके पहले-पहल आने से पहले।।

पहली नींद है सो लेने दे,

उनींदा सा सुरुर उठने के बाद।

शरीर टूटा है मन पुलकित,

रात की रानी दिन से पहले।।

समय का चक्का चक्क से बदले,

तीलि* बोली तू उसके बाद।

पाटन बीच से जो अनपिसा निकरे,

खेला यही है मरा न कोई वक्त से पहले।।

*Spoke पहिये की तीलि

Happy Diwali to you friends with bitter truth    ” जो मीठे से मर जाए उसे ज़हर देने की क्या ज़रूरत है”

एक शायर से पूछा किए ” जो मीठे से मर जाए उसे ज़हर देने की क्या ज़रूरत है” अपने शब्दों में व्याख्या किजीए।
उनका जवाब था ः
उसने मिठाई भेजी है दिवाली पर बधाई में,

जिसको शूगर है वोह उसकी choice पर मर मिटा है।

Think twice before wishing to diabetic

“Sweet Dreams”

A comparative study between Love bazaar and share company

A comparative study between
Love bazaar; share company
शेयर बाजार का रूख कुछ अप्रत्याशित है
सुना है वो बहुत भाव खाने लगा है ।

उसने buyback की इच्छा जताई है 
वो मुझसे अपने खत वापिस मांगने लगा है ।

इतनी बार दिल टूटा कि क्या बतांए,
वो घाघ ब्रोकन से ब्रोकर हो गया है।

उसके हाव-भाव से लगेगा वो टुटा हुआ है 
वो broker है प्यार  से धंधा ज़माने लगा है ।

ये प्रकृति जाने क्यूं अब रॉ मटेरियल सी लगती है ।

खूबसूरती जब शीशे में उतरने लगती है,
इक मय-परस्ती ज़हन में बिखेरने लगती है।
जैसे उड़ के आले में बैठकर दीपक अँधेरा टापता है
फिर सुबह उतरता है नीचे, और रात आले में सिमटने लगती है।

पहल करनी है तो नानी की लौरी से किजीए,
इक कनेक्शन है जिसमें टेक्नोलॉजी सौत लगती है।
जो चाँद टुकड़ों मे मिलता था रोज़ नये नुस्खे के साथ,
ये प्रकृति जाने क्यूं अब रॉ मटेरियल सी लगती है ।