Daily dose doesn’t always means medicine

Aaj ka vichar :

It’s not joke but real life experience.

Mein apne bete ko ungli laga laga kar sikha rha tha  ki beta ye nosy Hai ye eye Hai ye cheek Hai. And he is enjoying. Fir Maine kahan ab tumhari baari batao

“Where is your nosy.”

So he put the finger on face wherever he likes.
Lesson

Ask anything only finger works.
Next 

Doctor Sahab Mera Sara body dukhta Hai 

Jahan bhi ungli rakhta hun Dard hota Hai.

Doctor: ungli karna band kar. Teri ungli mein Dard Hai.

Don’t take it otherwise

मैडम :”भैया एक स्टूल देना ”

दुकानदार : क्या करेंगी मैडम 

मैडम : मैंने एक बांस ख़रीदा था मुझे उसकी ऊंचाई नापनी है .

दुकानदार : मैडम वो तो लिटाकर भी मापी जा सकती है.

मैडम: यू फूल ! मुझे उसकी लम्बाई नहीं ऊंचाई नापनी है 

ऊंचाई मतलब height 
Height of it.

Present scenario: what looks awkward is fashion/tredition

“उसके हिसाब का लुत्फ वो उठाना चाहता है,

जो जन्नत में रहकर जन्नत की दुआ चाहता है।

मेरा हादसा होते-२ कई बार रह गया,

खुदा न जाने मुझे किस मुश्किल में डालना  चाहता है।

बहुत शोर सुनते थे सीने में दिलका, सही बस एक बार धड़का, फिर धड़का न धड़का।

वो जिनकी नींद बिगड़ी है उनको शिकायत है शोर से,
ये खलिश* सी खलल में आती कहां से है।

*टीस/चिन्ता।

सिफत की मत पूछ मै जैसे तैसे ढल जाता हूं,
शरीर छूटता नही है ये मुक्ति आती कहां से है।

इस नम ज़मीन पर लोग उगाने लगे हैं वीराने,
जन्नत नसीब जिहाद से होगी, बच्चे के दिल में ये बात आती कहां से है।

कुछ बच्चे लड़ रहे थे आपस में, देखकर मन हुआ छुड़ा दूं,
पर मेरे ज़हन ने टोका तेरा विवेक न काम आएगा।

फिर सोचा वो तो थक के कुछ देर में खुद ही बैठ जाएंगें 
बड़ों का महजब बीचबचाव में दंगा करवाएगा।
…………

जब खीर गर्म थी मुंह जल गया कइयों का,
ठण्डी हुई तो उसी में मिला स्वाद सवइओं का।
Quote from holy book
“शराब पी,      दोज़ख में जाएगा”
जो जल्दी में थे शराब पीने लगे
अन्तराल इतना था दोज़ख तक पहुंचे ही नहीं।

कबीर कहते हैं तू पूजे पाथर तो म़ै पूजू़ पहाड़
           चाकी पाटन पूज ले, पीस खाए संसार।
और आगे कहते हैं
ता चड़ि मुल्ला बांग दे, बहरा हुआ खुदाय।
आज कबीर होते तो किसी न किसी फतवे के मातहत होते।

God with in with me Alone lonely

मंदिर और मस्जिद के बीच आवाज़ें टकराने लगी है 
एक मुँह से आती हैं और कान से  जाने  लगती  हैं।

कितना वक़्त गुज़रा होगा झनझनाहट नहीं जाती,
आँख खुलती नहीं है कि होश जाने लगती है।

अब भगवान ही कुछ करे, अल्लाह मालिक है 
प्रलय आने को है जब सब जगह से बर्फ पिघलने लगती है।

वो कुछ को नूर लगती है और कुछ को लालिमा 
ये सुबह की है या शाम की, ये पहचान जाने लगती है।

खुद को अँधेरे में रखकर, कौऐ का दर्द उल्लू क्या जाने।                   कोई माने या न माने दिलदारा,उल्टा चोर कोतवाल को जाने।

आज का विचारः विचार शिचार की छोड़ धँधे की 

                     बात कर 

मैने एक किस्सा सुना था कि एक सड़क के किनारे एक आदमी को चक्कर आ गये और वो इस कारण से गिर गया। अब हर आदमी सलाह दे रहा है कोई कह रहा कि मिर्गी आ गई है इसे जूता सुंघाओ,कोई कह रहा था इसे पानी पिलाओ। वगैरह वगैरा। तभी भीड़ में से एक बुढिआ बोली इसे खीर खिलाओं। 
ये सुनते ही वो बेहोश आदमी बोला “अरे इस बुढिया की भी कोई सुन लो”
आजकल सब लोग ईलाज के नामपर ही मार रहें हैं।

आजकल हर चारासाज* बीमारी की दुआ करे.
मरता क्या न करे, जीने की तमन्ना न करे।
*डाक्टर

मेरी कफन बेचने की दुकान है, और
मरना तो सभी को है एक दिन, मेरे पिछवाड़े क्यों न मरे।

…………
कितने लोग जमा हो गए गमख्वारी मेरी,

गम बांटने से  घटाया जा सकता है क्या

  

मुंह सम्भालूं या बचाऊं, ईमान से,
एक छींक से रूखसती का रास्ता बदला जा सकता है क्या।

उसका रास्ता काटना, बहुत नागवार गुजरता है,
मेरे महबूब का शौके-बिल्ली पालना हक अदा करता है क्या।
………………..